Memory Boosting Tips

1. पौष्टिक एवं संतुलित आहार लें : अंग्रेजी में एक कहावत है : You are what you eat अर्थात् आप जैसा खाते हैं हैं वैसे ही बन जाते हैं. संतुलित आहार स्वस्थ जीवन का आधार है. अक्सर लोग संतुलित आहार का अर्थ महंगा खाना समझ लेते हैं. यह धारणा एकदम गलत है. संतुलित आहार का अर्थ है कि ऐसा भोजन जिसमें भोजन के सभी आवश्यक तत्व उचित अनुपात में हों.
यह ज़रूरी नहीं है कि महंगा खाना ही संतुलित हो. हम अक्सर सस्ती चीज़ों को अपने भोजन में स्थान ही नहीं देते. जैसे : मौसमी फल, साग, अंकुरित चने आदि.    
2. अच्छी नींद : दिन भर स्फूर्ति से काम करने के लिए रात को अच्छी नींद आना बहुत ज़रूरी है. इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है. जैसे :
(i). दिन भर के तनाव को बिस्तर पर लेकर न जाएँ.
(ii). धूम्रपान से बचें.
(iii). चाय, कॉफ़ी आदि उत्तेजक पेय पदार्थों का सेवन कम से कम करें.
(iv). कसरत करें.
(v). योग करें.
3. चेतन बनें : अपने अन्दर चैतन्यता उत्पन्न करें. अपने चारों के वातावरण पर निगाह रखें,  देश-दुनिया के बारे में जानें, नित्य अखबार पढ़ें, टेलीविज़न देखें, रेडियो सुनें, हो सके तो इन्टरनेट प्रयोग करें. कभी मत सोचें कि अमुक खबर से हमें क्या लेना या अखबार हमारे किस काम का. सदैव याद रखें,  चैतन्यता सजीवों का लक्षण है और जड़ता निर्जीवों का. अब आप निर्णय लें कि आप सजीव बनना चाहते हैं या निर्जीव.
स्मरण रहे कि आपका मस्तिष्क एक मशीन की तरह है. इसे जितना प्रयोग करेंगे उतना ही बढ़िया यह काम करेगा. अन्यथा यह धीरे-धीरे निष्क्रिय हो जाता है.  
4. शरीर स्वस्थ रखें : हिंदी में एक कहावत है – “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है.” इस कहावत से आप भी परिचित होंगे. इसका अर्थ है कि यदि आप अपने मस्तिष्क से अच्छा काम लेना चाहते हैं, तो आपको अपने शरीर को स्वस्थ एवं रोग-मुक्त रखना होगा. मस्तिष्क को शरीर से अलग रखकर नहीं देखा जा सकता. अच्छा भोजन, अच्छा साहित्य, अच्छे विचार, अच्छी संगत, थोड़ा शारीरिक श्रम, धूम्रपान से दूरी रखकर आप आसानी से अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं. यकीन जानिये अगर आप एक स्वस्थ शरीर के मालिक हैं, तभी आप एक तेज़ दिमाग के बारे में सोच सकते हैं.      
5. यथार्थवादी बनें : यथार्थ से कोई नहीं बच सकता. आज नहीं तो कल सभी को सच का सामना करना है पड़ता है. इसलिए यथार्थवादी बनें. स्वयं को आइंस्टीन या न्यूटन मान कर न चलें. जो यथार्थ का सामना करना सीख गया, समझिये कि उसने वक़्त को जीत लिया.
याद रखिये कभी – कभी हम परीक्षा में इसलिए भी असफल हो जाते हैं कि हम अति आत्मविश्वास से भर जाते हैं. अक्सर बच्चे गणित में बहुत से सवालों को देखकर छोड़ देते हैं. उन्हें लगता हैं कि इन्हें क्यों हल किया जाए? ये हो बहुत ही आसान हैं. पर जब वही सवाल परीक्षा में आ जाते हैं तो उनके पसीने छूट जाते हैं. यह अति आत्मविश्वास के कारण हो जाता है.    
6. कार्यों का वरीयता क्रम बनाएं : हमारे पास दिन भर में अनेक काम होते हैं. इनमें से कुछ कार्य अधिक महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि अन्य कार्य उतने महत्वपूर्ण नहीं होते. कहीं ऐसा न जो जाए कि कार्य की अधिकता या समय की कमी के कारण कुछ कार्य छूट जाएँ. इसका सबसे अच्छा उपाय है कि कार्यों की एक वरीयता सूची बनायी जाए. इस सूची में सबसे ज़रूरी काम सबसे ऊपर, कम ज़रूरी काम उससे नीचे और सबसे कम ज़रूरी काम सबसे नीचे लिखें जाएँ. हो सके तो सभी का समय भी लिख लें. इससे न तो आपका कोई काम छूटेगा, न ही आपका समय कम पड़ेगा.
विद्यार्थी इसी प्रकार की सूची अपने पूरे वर्ष के कार्यों के लिए भी बना सकते हैं और बिना भूले अपना हर काम निपटा सकते हैं. अपने पूरे वर्ष के पाठ्यक्रम को महीनों, सप्ताहों के हिसाब से बाँट लें और फिर उसकी एक वरीयता सूची बना लें. फिर उस सूची के हिसाब से अपना पाठ्यक्रम पूरा करें.       
7. एक समय में एक ही काम करें : अंग्रेजी में एक कहावत है, “Work while you work and play while you play. इसका आशय यह है कि एक समय में एक ही कार्य किया जाए अन्यथा कोई भी काम ठीक से नहीं हो पायेगा. मान लीजिये आप टेलीविज़न देखते – देखते किसी पाठ को याद कर रहे हैं. तो इस स्थिति में न तो आप टेलीविज़न का आनंद उठा पाएंगे और न ही अपना पाठ याद कर पाएंगे.    
8. अधिक से अधिक पढ़ें : हमारा दिमाग भी एक मशीन की तरह कार्य करता है. जिस प्रकार किसी मशीन को जब तक हम चलाते रहते हैं तब तक वह ठीक प्रकार से काम करती रहती है और यदि उसे चलाना छोड़ देते हैं तो धीरे – धीरे उसकी कार्यक्षमता कम होती जाती है और अन्तत: वह काम के लायक नहीं रह जाती.
ठीक उसी प्रकार हम अपने दिमाग का जितना अधिक प्रयोग करते हैं वह उतना ही प्रखर होता जाता है. इसलिए अधिक से अधिक पढ़ें.

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